बेस्ट सेलर उपन्यास ‘सन्यासी योद्धा’ के लेखक कौस्तुभ आनंद चंदोला जी से एक साक्षात्कार

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Buuks2Read को साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय देने के लिए कौस्तुभ आनंद चंदौला जी का धन्यवाद करते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि कौस्तुभ आनंद चंदौला जी का एक निबंध संग्रह ‘हिमालय की चिट्ठियाँ’ पिछले दिनों ही प्राची डिजिटल पब्लिकेशन से प्रकाशित हुआ है। इससे पूर्व भी कौस्तुभ जी की कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकीं हैं जिनमें बेस्ट सेलर रह चुका उपन्यास ‘सन्यासी योद्वा’ भी शामिल है। वर्तमान में पेशे से एक समाजसेवक एवं साहित्यसेवी कौस्तुभ आनंद जी ने Buuks2Read को साक्षात्कार के दौरान अपने जीवन के अनुभवों एवं साहित्यिक सफरनामा को बहुत ही सुंदर तरीके से शेयर किया। आशा करते हैं कि पाठकों को कौस्तुभ आनंद चंदौला जी का साक्षात्कार पसंद आएगा। साक्षात्कार के कुछ प्रमुख अंश आपके लिए प्रस्तुत हैं-

Interview with Kaustubh Anand Chandola

Buuks2Read : कौस्तुभ आनंद चंदौला जी, नमस्कार। हम आपका शुक्रिया करना चाहते हैं क्योंकि आपने हमें साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय दिया। यदि आप अपने शब्दों में आप अपना परिचय देंगें, तो सम्मानित पाठक आपके बारे मे ज्यादा जान पायेंगे?

Kaustubh Anand Chandola : मैं कौस्तुभ आनंद चंदोला, मूल रूप से उत्तराखंड का निवासी हूं। प्रारंभिक शिक्षा प्रकृति से भरपूर हिमालय की गोद में बसे गांव बिंतोली, जिला बागेश्वर मैं सम्पन्न हुई। आगे की शिक्षा के लिए अपने बड़े भाई के पास कानपुर चला आया, वहां मैंने इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की। उसके बाद अपने सबसे बड़े भाई के पास लखनऊ आ गया, जहां से मैंने लखनऊ विश्वविद्यालय से वाणिज्य स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त कर सरकारी सेवा में लग गया। इस तरह उत्तराखंड जो कि मेरी जन्मभूमि है लगभग छूट गई। हालांकि बाद में, मैं निरंतर वर्ष में एक बार अपने मातृभूमि में जाने का प्रयास रहा हूं, क्योंकि वह मेरे लेखन को बहुत प्रभावित करती है । वर्तमान में मेरे दो पुत्र एवं दो बहुएँ और एक प्यारी सी पोती हैं। दोनों पुत्र सुव्यवस्थित हो चुके हैं, अतः मैं और मेरी पत्नी लखनऊ में अपने एक छोटे से मकान में निवास करते हैं। फ़रवरी 2017 में सरकारी सेवा से निवृत्त हुआ हूं। अब पूरी तरह समाजसेवा और लेखन में व्यस्त हूं।

Buuks2Read : आपकी पहली प्रकाशित पुस्तक बारे में जानकारी दे, ताकि पाठक आपकी किताब के बारे में ज्यादा जान सकें?

Kaustubh Anand Chandola : मेरी पहली पुस्तक उत्तराखंड के लोक नायक ‘न्याय का देवता’ कहे जाने वाले गोलू देवता की जीवन गाथा पर आधारित है। इस उपन्यास का नाम ‘सन्यासी योद्धा’ है। इस पुस्तक के चार संस्करण अब तक प्रकाशित हो चुके हैं। अब इसका अंग्रेज़ी भी इसका संस्करण प्रकाशित होने जा रहा है। साथ ही कुमाऊनी भाषा में भी मैं, स्वयं इसका अनुवाद कर रहा हूं। उसके पश्चात मेरी तीन उपन्यास और प्रकाशित हो चुके हैं जिसमें ‘चंद्रवंशी’ अल्मोड़ा के इतिहास के एक कालखंड पर आधारित है आप ऐतिहासिक उपन्यास कह सकते हैं ।

Buuks2Read : आपकी पुस्तक ‘हिमालय की चिट्ठियाँ’ पिछले दिनों ही प्रकाशित हुई है, उसके बारे में जानकारी दे, ताकि पाठक आपकी किताब के बारे में ज्यादा जान सकें?

Kaustubh Anand Chandola : पिछले दिनों मेरी जो नई कृति प्रकाशित हुई है उसका नाम है ‘हिमालय की चिट्टियां’ यह एक निबंध संग्रह में। हिमालय का मानवीकरण करते हुए उसकी पीड़ा, पर्यावरणीय चिंता और विस्तृत विवरण इस निबंध संग्रह में उल्लेख मिलेगा। साथ ही हिमालय से पलायन को ‘विस्थापन के दर्द’ के रूप में प्रस्तुत किया है। गांवों से शहरों की ओर पलायन का मार्मिक वर्णन इस पुस्तक में वर्णित है। इसी के साथ ही ‘उत्तराखंड में नाग पूजा’, उत्तराखंड की लोक साहित्य तथा अन्य विषयों को भी इस निबंध संग्रह में सम्मिलित किया गया है। इसमें से अधिकांश लेख विभिन्न समाचार पत्रों या पत्रिकाओं में पूर्व में प्रकाशित हो चुके हैं। जिन्हें मैंने एक स्थान पर संग्रहित करने का प्रयास किया है। आशा है इसमें वर्णित निबंध अवश्य ही पाठकों को पसंद आएंगे।

Buuks2Read : पुस्तक प्रकाशित कराने का विचार कैसे बना या किसी ने प्रेरणा दी?

Kaustubh Anand Chandola : जैसा मैंने पहले बताया कि लिखना काफी पहले से प्रारंभ कर दिया था, क्योंकि सरकारी सेवा में होने के कारण अधिक समय लेखन और प्रकाशन को नहीं दे पाया, लेकिन मेरी प्रथम कृति जो 440 पृष्ठ का वृहद उपन्यास था, प्रकाशित करने मैं मुझे लगभग चार बर्ष लग गए, इसके बाद मैं निरंतर लिखता रहा और पुस्तकें प्रकाशित करने हेतु मुझे समय भी मिल गया और आर्थिक समस्या भी लगभग समाप्त हो गई थी।

Buuks2Read : पुस्तक के लिए रचनाओं के चयन से लेकर प्रकाशन प्रक्रिया तक के अनुभव को पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगें?

Kaustubh Anand Chandola : रचनाओं के विषय का चयन बहुत ही कठिन है विशेष तौर से उपन्यास के लेखन में आपको बहुत अधिक सावधानी और उस विषय की गहराई को समझना पड़ता है। रचनाओं के चयन में लेखक का व्यक्तित्व भी झलकता है, इसलिए बिषय चयन में विशेष सावधानी रखना आवश्यक है। बाजार में कई प्रकाशक आज उपलब्ध हैं जो अच्छी सेवाएं दे रहे हैं। ‘हिमालय की चिट्ठियां’ कृति प्रकाशित करने में भी मुझे विशेष कठिनाई नहीं हुई। इसके लिए प्राची डिजिटल पब्लिकेशन का मुझे बहुत सहयोग प्राप्त हुआ और मैं प्रकाशन की प्रक्रिया से काफी संतुष्ट हूं।

Buuks2Read : आपकी पहली सृजित रचना कौन-सी है और साहित्य जगत में आगमन कैसे हुआ, इसके बारे में बताएं?

Kaustubh Anand Chandola : यह मैं बता चुका हूं कि मेरी पहली कृति उपन्यास-‘सन्यासी योद्धा’ है। जिसका अंग्रेजी में संस्करण ‘ ए मौंक वैरियर’ के नाम से प्रकाशित होने जा रही है। साहित्य पढ़ने में रुचि मेरी प्रारंभ से ही रही लेकिन समय के अभाव और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण लेखन में अधिक समय नहीं दे सकता था, लेकिन जैसे-जैसे पारिवारिक जिम्मेदारियां कम होती गई और सरकारी सेवा में समय मिलता गया मैं लेखन की ओर अग्रसर हो गया। फिर मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा सन 2005 से लिखते हुए मेरी पहली पुस्तक 2012 में पूरी हो पाई तथा उसे प्रकाशित कराने में दो बर्ष लगे। मुझे यह बताते हुए बड़ी प्रसन्नता होती है कि मेरी यह पहली कृति को ‘उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ’ द्वारा अमृतलाल नागर साहित्य पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया । उसके बाद तो मैं नहीं पीछे मुड़कर नहीं देखा।उसके बाद हर साल लगभग एक किताब मेरी निकलती है जैसा कि मैं पहले बता चुका हूँ।

Buuks2Read : अब तक के साहित्यिक सफर में ऐसी रचना कौन सी है, जिसे पाठकवर्ग, मित्रमंडली एवं पारिवारिक सदस्यों की सबसे ज्यादा प्रतिक्रिया प्राप्त हुई?

Kaustubh Anand Chandola : निश्चित रूप से मेरी पहली कृति ‘सन्यासी योद्धा’ सबसे ज्यादा चर्चित रही क्योंकि बहुत ही मार्मिक लोक गाथा पर आधारित है जिसे मैंने उपन्यास के रुप दिया। यह बिल्कुल अलग तरह का अनुभव था, उसके बाद ‘चंदवंशी’, ‘प्रेत मां’ उपन्यास और ‘गर्म राख’ कहानी संग्रह काफी अधिक चर्चा में रही।

Buuks2Read : किताब लिखने या साहित्य सृजन के दौरान आपके मित्र या परिवार या अन्य में सबसे ज्यादा सहयोग किससे प्राप्त होता है?

Kaustubh Anand Chandola : जब आप किसी नए क्षेत्र में प्रवेश करते हैं समाज से जरूर आपको अधिक सहयोग नहीं मिलता है या यह कहिए कि कई व्यंग्य सुनने पड़ते हैं, लेकिन अगर आपको अपने जीवनसाथी और परिवार का सहयोग मिले तो निश्चित ही आप क्षेत्र में सफल होते हैं । समाज तो जब आपकी कोई सफलता सामने आ जाती है तभी वह आप को मान-सम्मान देता है। उसके पहले तो निश्चित ही वह व्यंग करता है या हतोत्साहित करता है लेकिन अगर आप उस स्थित को पार कर गए तो आप निश्चित ही सफल होंगे। इस संदर्भ में, अपने परिवार तथा मेरे एक-दो मित्रों ने मुझे लेखन के लिए जरूर सहयोग किया।

Buuks2Read : साहित्य जगत से अब तक आपको कितनी उपलब्धियाँ / सम्मान प्राप्त हो चुके हैं? क्या उनकी जानकारी देना चाहेंगें?

Kaustubh Anand Chandola : साहित्य जगत मैं आने के पश्चात सबसे पहले मेरी कृति ‘सन्यासी योद्धा’ को जैसा मैंने पहले बताया ‘अमृतलाल नागर साहित्य पुरकार-2015’ उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा प्रदान किया गया। उसके बाद ‘पर्वतीय महापरिषद लखनऊ’ द्वारा ‘गोपाल उपाध्याय स्मृति साहित्य सम्मान’ माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करकमलों से प्राप्त हुआ। सरकारी सेवक होने के कारण उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी साहित्य परिषद द्वारा मुझे 2017 में ‘अमृतलाल नागर साहित्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इसके पश्चात तो मुझे दर्जनों मंचों से साहित्य सम्मान प्राप्त हुए। मेरी सेवाओं को देखते हुए उत्तराखंड सरकार द्वारा मुझे बर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य भाषा संस्थान का सदस्य नामित किया और 2022 में संस्थान के पुनर्गठन पर पुनः मुझे 3 वर्ष के लिए सदस्य नामित किया गया। जहां से उत्तराखंड के साहित्यकारों, लेखकों, पत्र-पत्रिकाओं के प्रोत्साहन, उन्नयन के लिए अपने स्तर से प्रयासरत हूं।

Buuks2Read : आप सबसे ज्यादा लेखन किस विद्या में करतें है? और क्या इस विद्या में लिखना आसान है?

Kaustubh Anand Chandola : जैसा कि बड़े-बड़े साहित्यकारों ने स्पष्ट किया है की उपन्यास लेखन की विधा सबसे कठिन मानी गई है। उसके बाद अन्य विधाओं आती है। निश्चित ही मेरे भी चार उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं इसलिए मुझे उपन्यास लेखन में बड़ी रूचि है। उसके बाद कहानी, निबंध और कविताएं लिखना भी मेरी पसंद है।

Buuks2Read : आप साहित्य सृजन के लिए समय का प्रबंधन कैसे करते हैं?

Kaustubh Anand Chandola : सेवाकाल में निश्चित रूप से लेखन के लिए समय निकालना कठिन था। लेकिन 2017 में सेवानिवृत्त होने के बाद मेरे पास समय की कोई कमी नहीं थी इसलिए समय प्रबंधन में अब वर्तमान समय में सेवानिवृत्त के बाद कोई कठिनाई नहीं है।

Buuks2Read : आप अपनी रचनाओं के लिए प्रेरणा कहां से प्राप्त करते है?

Kaustubh Anand Chandola : रचनाओं के लेखन की प्रेरणा के अगर बात करते हैं तो मैं किसी व्यक्ति विशेष से प्रेरित नहीं हुआ । प्रारंभ में, मैं जासूसी उपन्यास पढ़ा करता था एक समय था जब जासूसी उपन्यास का बड़ा बाजार हुआ करता था, उपन्यास किराए पर भी मिलते थे, लेकिन धीरे-धीरे मेरी रुचि जासूसी उपन्यासों से हटकर साहित्यिक उपन्यासों की ओर हो गई तब मैंने जाना की अब तक मैं शायद समय को नष्ट कर रहा था हालांकि यह बात सत्य है कि कुछ भी पढें या लिखें तो उससे आपको कुछ न ज्ञान व अनुभव तो प्राप्त होता ही है । फिर तो मैं साहित्य का पठन-पाठन करने लगा और उसी से ही मुझे साहित्य लिखने की रुचि उत्पन्न हो गई इसलिए मैं साहित्य को पढ़ने को ही अपना प्रेरणास्रोत मानता हूं। साहित्य पढ़ने से कारण मेरे अंदर जो भाव उत्पन्न हुए और साहित्य के प्रति जो प्रेम उत्पन्न हुआ उसी को में रचनाओं को लिखने की प्रेरणा मानता हूं।

Buuks2Read : आपके जीवन में प्राप्त विशेष उपलब्धि या यादगार घटना, जिसे आप हमारे पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहते हैं?

Kaustubh Anand Chandola : जब आप कोई महत्वपूर्ण पुस्तक पर लिख लेते हैं और वह प्रकाशित होकर बिकने लगती है तो निश्चित ही आपको एक संतुष्टि मिलती है मेरी पहली ही कृति सन्यासी योद्धा बहुत ही प्रसिद्ध हुई, लोगों ने उसको हाथों-हाथ लिया और अब उसके चार संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं उसके बाद अब अंग्रेजी में भी उसका संस्करण निकल रहा है ।

मुझे एक बार इस विषय पर याद है, मैंने जब यह अपना उपन्यास माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के हाथों में दिया और बताया कि इस उपन्यास का नायक भी गुरु गोरखनाथ का शिष्य था और मूल रूप से वह भी सन्यासी था लेकिन प्रजा में फैले अत्याचार, शोषण, अनाचार को देखते हुए उस सन्यासी ने योद्धा का रूप धारण किया और उस शोषण अत्याचार अनाचार को समाप्त किया, मैंने उनसे कहा, इसी प्रकार आप भी उसी गुरू शिष्य परंपरा से हैं और आपने भी संन्यासी हो कर भी, अत्याचार शोषण अन्याय के विरुद्ध प्रजातांत्रिक हथियार उठाया है और मुख्यमंत्री बनकर आप प्रजातांत्रिक तरीके से प्रजा का कष्ट दूर कर रहे हैं । अतः आप मेरे उपन्यास के नायक के गुरु भाई हैं। आप का कार्य भी एक सा है, इसलिए इस उपन्यास का शीर्षक आप पर सही बैठता है। इससे वे बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने कहा, मैं इस पुस्तक को जरूर पढूंगा। तो यह मेरे लिए यादगार पल था। उसके बाद मैं उनसे कई बार मिला और वह सदा उस बात को याद रखे हुए थे।

इसी तरह एक अनजाना फोन एक दिन आया जो कि एक महिला का फोन था। उसने फोन कर पूछा आप कौस्तुभ आनंद चंदोला बोल रहे हैं। उन्होंने कहा आप इस तरह क्यों लिख देते हैं? मुझे घबराहट हुई कि शायद मैंने कोई गलत शब्द लिख दिया हो या किसी को बुरा लगा हो। तो मैंने उनसे पूछा क्या मेरे से गलती हो गई लेखन में, तो उसने कहा, नहीं नहीं आपने इतना अच्छा लिखा कि मैं रो पड़ी और मुझे अपनी शादी की याद आ गई। आपका फोन नंबर आपके पुस्तक के पीछे देखा तो मैंने आपको फोन मिला दिया।। मैंने उनको कोटि-कोटि धन्यवाद किया और मैंने सोचा चलो मेरे लेखन में किसी को रुलाने की क्षमता है।

Buuks2Read : हर लेखक का अपना कोई आईडियल होता है, क्या आपका भी कोई आईडियल लेखक या लेखिका हैं? और आपकी पसंदीदा किताबें जिन्हें आप हमेशा पढ़ना पसंद करते हैं?

Kaustubh Anand Chandola : निश्चित ही मैंने बहुत सारे साहित्यिक उपन्यास पढे, इसलिए मैं साहित्य लेखन के क्षेत्र में सबसे अधिक प्रभावित हूं तो वह आचार्य चतुरसेन के लेखन से हूं उसके बाद नरेंद्र कोहली और ययाति उपन्यास के मराठी लेखक बिष्णु सखाराम के लेखन से बहुत प्रभावित हूं और उनको इस तरह से मैं कह सकता हूं कि उनको मैं अपना आइडियल मानता हूं।

Buuks2Read : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

Kaustubh Anand Chandola : हिंदी भाषा का विस्तार बहुत अधिक है अगर जनसंख्या के हिसाब से देखें तो इसको पढ़ने वाले बहुत अधिक लोग हैं। यदि अच्छा साहित्य लिखा जाए तो यह लोगों के बीच बहुत ही लोकप्रिय होता है। मैं मूल रूप से कुमाऊं वासी हूं, कुमाऊनी भाषी लोग हिन्दी भी समान रुप से लिखते, पढ़ते व बोलते हैं। इसलिए मैं कुमाऊनी में भी लिखता हूं, लेकिन हिंदी साहित्य का विस्तार होने के कारण अगर हम हिंदी में लिखते हैं तो हमें काफी अधिक पाठक मिलते हैं और यह हमारी राजभाषा भी है। देश का गौरव भी है हमें प्रयास करना होगा कि हिंदी में और अधिक अच्छा साहित्य, सकारात्मक साहित्य लिखा जाये, हिन्दी साहित्यकार को अन्य भाषाओं के शब्दों का प्रयोग जहां आवश्यक हो वही करना चाहिए।

Buuks2Read : साहित्य सृजन के अलावा अन्य शौक या हॉबी, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?

Kaustubh Anand Chandola : हिंदी साहित्य के अलावा मेरा मुख्य शौक समाज सेवा है। लखनऊ के विभिन्न सामाजिक संगठनों के शीर्ष पदों पर रहा हूं। वर्तमान में भी निरंतर सामाजिक सेवा में लगा हुआ हूं। साथ ही समाचार पत्रों में स्तंभ लेखन का भी निरंतर कार्य कर रहा हूं । लखनऊ से प्रकाशित हो रहे विभिन्न समाचार पत्रों मेरा स्तंभ लेखन, संपादकों द्वारा चाहे गए विषयों पर या अपने रूचि के लेखता हूं। खेल में बैडमिंटन बहुत पसंद है लेकिन क्योंकि उम्र मेरी 67 वर्ष होने जा रही है इसलिए उसको खेलना थोड़ा कठिन होता जा रहा है। हां मुझे खाना बनाने का मुझे बहुत शौक है।

Buuks2Read : क्या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?

Kaustubh Anand Chandola : लेखक के मस्तिष्क में बहुत सारे विषय-बीज पडे रहते हैं और वह धीरे-धीरे उन्हें अंकुरित करने का प्रयास करता है और जब वह अंकुरित होकर पल्लवित होने लगते हैं तो वह उन्हें लिखने बैठ जाता है। इसी तरह मेरे मस्तिष्क में भी दो-तीन विषय चल रहे हैं। जिसमें मैंने कुछ पृष्ठों तक लेखन कर भी दिया है, लेकिन जैसा मैंने कहा उपन्यास विधा बड़ी जटिल है लंबी है। तो इसमें समय लगता है । अतः मैं अभी दो उपन्यासों के प्रारंभिक लेखन कर रहा हूं। एक कविता संग्रह और एक कहानी संग्रह प्रकाशनाधीन है।

Buuks2Read : साहित्य की दुनिया में नये-नये लेखक आ रहे है, उन्हें आप क्या सलाह देगें?

Kaustubh Anand Chandola : साहित्य लेखन निश्चित ही बहुत ही सुरुचिपूर्ण विषय है। मैं आज के आधुनिक साहित्य लेखकों को यही सलाह देना चाहूंगा कि सामाजिक विषयों पर व्यंग जरूर करें, उनको दृढ़ता से लोगों के समक्ष रखें, परंतु उसमें नकारात्मक भाव ना हो। आजकल लेखक विशेष तौर से नकारात्मक चरित्रों पर अधिक लिख रहे हैं क्योंकि उनसे उन्हें अधिक प्रसिद्ध जल्दी मिल जाती है। लेकिन यह समाज के लिए कोई अच्छा उदाहरण प्रस्तुत नहीं करते हैं। अतः अच्छे चरित्र को लोगों के सामने अच्छे ढंग से प्रस्तुत करना, समाज में फैली कुरीतियों, छुआछूत, भेदभाव आदि को सकारात्मक ढंग से कड़े शब्दों में लिखना चाहिए ऐसा मेरा सुझाव है।

Buuks2Read : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?

Kaustubh Anand Chandola : इसमें कोई दौरा ही नहीं है कि जो विषय मैं लिख रहा हूं लेकिन की दुनिया में हो इससे बाहर जाने का तो प्रश्न ही नहीं है और निरंतर जब तक आंखें और हाथ काम करते रहेंगे मैं लिखता ही रहूंगा।

Buuks2Read : यह अंतिम प्रश्न है, आप अपने अज़ीज शुभचिन्तकों, पाठकों और प्रशंसकों के लिए क्या संदेश देना चाहते हैं?

Kaustubh Anand Chandola : मैं अपने शुभचिंतकों और पाठकों से यही कहना चाहता हूं कि आजकल किताबें बहुत कम खरीदी जा रही है, पठन-पाठन कम होता जा रहा है क्योंकि मोबाइल की दुनिया, टीवी की दुनिया इतनी रंगीली चमक दमक के साथ और विजुअल तरीके से प्रस्तुत होती है कि कहानी उपन्यास पढ़ना लोग लगभग छोड़ चुके हैं। अतः मैं सभी से अनुरोध करूंगा कुछ समय जरूर पठन-पाठन में निकालें विशेष तौर से जिलों के पास समय है, वह साहित्य उपन्यास लेख निबंध जो भी उनको रुचकर लगे किताब खरीद कर या इसी से सहयोग से प्राप्त करके अवश्य ही मेरा सब से अनुरोध है।

आप कौस्तुभ आनंद चंदौला जी की पुस्तक ‘हिमालय की चिट्ठियाँ’ को अपने पसंदीदा ऑनलाइन स्टोर अमेजन या फ्लिपकार्ट से मंगा सकते हैं। किताब का लिंक नीचे दिए गये हैं।

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