काव्य संकलन ‘दिल ने कहा’ की लेखिका गीता अग्रवाल जी से एक साक्षात्कार

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Buuks2Read को साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय देने के लिए गीता अग्रवाल जी का धन्यवाद करते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि गीता अग्रवाल जी का एक काव्य संग्रह ‘दिल ने कहा’ पिछले दिनों ही प्रकाशित हुआ है, जो कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हुआ है। और इसके साथ ही आपके द्वारा एक अन्तरराष्ट्रीय साझा संकलन ‘विश्व की अखंड किरणें’ का सफल संपादन भी किया गया है। पेशे से एक शिक्षिका एवं समाजसेविका गीता अग्रवाल जी ने Buuks2Read को साक्षात्कार के दौरान पुस्तक प्रकाशन के अनुभव एवं साहित्यिक सफर को शेयर किया। आशा करते हैं कि पाठकों को गीता अग्रवाल जी का साक्षात्कार पसंद आएगा। साक्षात्कार के कुछ प्रमुख अंश आपके लिए प्रस्तुत हैं-

काव्य संकलन 'दिल ने कहा' की लेखिका गीता अग्रवाल जी से एक साक्षात्कार

Buuks2Read : गीता अग्रवाल जी, नमस्कार। हम आपका शुक्रिया करना चाहते हैं क्योंकि आपने हमें साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय दिया। यदि आप अपने शब्दों में आप अपना परिचय देंगें, तो सम्मानित पाठक आपके बारे मे ज्यादा जान पायेंगे?

गीता अग्रवाल : मैं गीता अग्रवाल, बीकानेर, राजस्थान मेरा जन्म स्थान है, वहीं मेरी संपूर्ण शिक्षा हुई। मैंने एम.ए. (राजनीति शास्त्र), बी.एससी. (जीव विज्ञान), बी.एड. किया है। मेरा विवाह उत्तर प्रदेश के चंदौसी नगरी, जिला मुरादाबाद में हुआ। विवाह उपरांत पति के साथ कई शहरों में रही, क्योंकि मेरे पति यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में ब्रांच मैनेजर रहे। मेरे 2 पुत्र माइक्रोसॉफ्ट एवं अमेजॉन कंपनी में कार्यरत हैं। मेरे पति ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर मैंने और मेरे पति ने अंत में हैदराबाद, तेलंगाना में स्थाई निवास रूप से रहने का निर्णय लिया।

Buuks2Read : आपकी पहली पुस्तक पिछले दिनों ही प्रकाशित हुई है, उसके बारे में जानकारी दे, ताकि पाठक आपकी किताब के बारे में ज्यादा जान सकें? (यदि पहली पुस्तक है?)

गीता अग्रवाल : एकल पुस्तक के रूप में मेरी यह पहली पुस्तक है, इस पुस्तक से पाठक को कहीं भी नहीं लगेगा कि मैं इस पुस्तक से अलग हूं, उनको लगेगा कि यह सब मेरे ही भाव हैं पाठक के दिल को छूने वाले भाव हैं। इस पुस्तक में मैंने जीवन के हर पहलू को छूने का प्रयास किया है।

Buuks2Read : आपकी पुस्तक ‘दिल ने कहा’ पिछले दिनों ही प्रकाशित हुई है, उसके बारे में जानकारी दे, ताकि पाठक आपकी किताब के बारे में ज्यादा जान सकें?

गीता अग्रवाल : ‘दिल ने कहा’ मेरी पुस्तक दिल के ही उदगार हैं, मेरे क्या समाज के दिल के उद्गार हैं, लेखक पर आसपास का, समाज का प्रभाव पड़ता है और उसी के अनुरूप भाव खुद-ब-खुद शब्दों में रच बस जाते हैं।

Buuks2Read : गीता अग्रवाल जी, पुस्तक प्रकाशित कराने का विचार कैसे बना या किसी ने प्रेरणा दी?

गीता अग्रवाल : पारिवारिक जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने के कारण कभी प्रकाशित करने की ओर ध्यान ही नहीं गया। अब जब जिम्मेदारियों से थोड़ा मुक्त हुए और फिर कोविड-19 ने घरों में कैद कर दिया तब समय मिला। खूब लिखा। बिखरे हुए साहित्य को एक रूप देने के लिए मेरे पति कृष्ण प्रकाश अग्रवाल ने पुस्तक छपवाने पर जोर दिया। इससे पूर्व मैं साझा संकलन और समाचार पत्रों में अपनी कविताएं भेजती रहती थी। पुस्तक प्रकाशन का संपूर्ण श्रेय मेरे पति को जाता है।

Buuks2Read : पुस्तक के लिए रचनाओं के चयन से लेकर प्रकाशन प्रक्रिया तक के अनुभव को पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगें?

गीता अग्रवाल : जैसा की पुस्तक का नाम है ‘दिल ने कहा’ सभी जानते हैं कि दिल बहुत कोमल होता है और पल-पल बदलता रहता है, कभी वह अध्यात्मिक हो जाता है, कभी चंचल हो जाता है, कभी त्योहारों में खो जाता है, कभी प्रेम के वश में रहता है, कभी दर्द से भर जाता है, कभी देश भक्ति में रम जाता है। सुख-दुख, शिकायतें सभी ध्यान में रखते हुए रचनाओं का चयन हुआ है। प्रकाशन प्रक्रिया बहुत ही खूबसूरत रही कहीं कोई व्यवधान नहीं आया।

Buuks2Read : आपकी पहली सृजित रचना कौन-सी है और साहित्य जगत में आगमन कैसे हुआ, इसके बारे में बताएं?

गीता अग्रवाल : मेरी पहली सृजित रचना ‘छोटी सी कली जब दुनिया में आई’ जब मैं 12 वर्ष की थी। मेरा लेखन कार्य तो बचपन से होता रहा है, मुझे ऐसे परिवार में विकसित होने का अवसर मिला जहां साहित्य ही सर्वोपरि था। घर में काफी कवि गोष्ठियां होती थी। मेरी मां डॉ. सुशीला गुप्ता के पास एक बार मैंने एक फोटो देखी जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी मेरे माता-पिता के साथ थे। तब मैंने उनसे पूछा तब उन्होंने बताया कि हमारे घर पर कवि गोष्ठी में आए थे। यह बात बहुत पुरानी है जब वे जनसंघ पार्टी में थे। मेरा साहित्य भी ऐसे ही बिखरा हुआ डायरी के पन्नों में लिखा गया, कभी खो गया।

Buuks2Read : अब तक के साहित्यिक सफर में ऐसी रचना कौन सी है, जिसे पाठकवर्ग, मित्रमंडली एवं पारिवारिक सदस्यों की सबसे ज्यादा प्रतिक्रिया प्राप्त हुई?

गीता अग्रवाल : वैसे तो एक ही रचना के बारे में कहना मुश्किल है मेरी कई कविताएं पाठकों द्वारा अत्यधिक पसंद की गई हैं फिर भी एक कविता ‘गलतफहमी का इलाज नहीं कोई’ काफी पसंद की गई।

Buuks2Read : गीता अग्रवाल जी, किताब लिखने या साहित्य सृजन के दौरान आपके मित्र या परिवार या अन्य में सबसे ज्यादा सहयोग किससे प्राप्त होता है?

गीता अग्रवाल : सबसे अधिक सहयोग तो मेरे पति श्री कृष्ण प्रकाश अग्रवाल का रहा। परिवार मित्र भी प्रोत्साहित तो करते हैं।

Buuks2Read : गीता अग्रवाल जी, साहित्य जगत से अब तक आपको कितनी उपलब्धियाँ / सम्मान प्राप्त हो चुके हैं? क्या उनकी जानकारी देना चाहेंगें?

गीता अग्रवाल : अभी हाल में ही मुझे कुछ सम्मान प्राप्त हुए हैं, जिनका विवरण निम्न प्रकार है-

  1. साहित्य विभूषण( काव्यधारा प्रकाशन साहित्यिक समूह) 2021
  2. राजन चौधरी साहित्य पुरस्कार, तेलंगाना 2022
  3. काव्य भास्कर सम्मान( काव्यधारा प्रकाशन साहित्यिक समूह) 2022
  4. साहित्य शिरोमणि पुरस्कार( साहित्य रेखा संस्थान दिल्ली)

इसके अलावा अन्य कई सम्मान पहले भी प्राप्त हुए हैं।

Buuks2Read : गीता अग्रवाल जी, आप सबसे ज्यादा लेखन किस विद्या में करतें है? और क्या इस विद्या में लिखना आसान है?

गीता अग्रवाल : मेरा लेखन छंद मुक्त कविता में अधिक रहा है वैसे तो मैं आलेख, लघु कथाएं आदि भी लिखती रही हूं लेकिन मेरी रुचि छंद मुक्त कविता में अधिक है। हाँ, इस विद्या में लिखना आसान तो है।

Buuks2Read : गीता अग्रवाल जी, आप साहित्य सृजन के लिए समय का प्रबंधन कैसे करते हैं?

गीता अग्रवाल : जब अचानक मन में भाव आते हैं तो उनको उसी समय शब्दों में उतारना जरूरी होता है, अन्यथा भाव धूमिल हो जाते हैं, फिर हाथ नहीं आते हैं इसलिए जब भी भाव आते हैं, मैं लिखने बैठ जाती हूं और जब समय मिलता है तो उसको फिर सही करती हूं।

Buuks2Read : गीता अग्रवाल जी, आप अपनी रचनाओं के लिए प्रेरणा कहां से प्राप्त करते है?

गीता अग्रवाल : रचनाओं के लिए प्रेरणा तो हमारा समाज ही देता है, कुछ साहित्यिक समूह भी प्रेरणा के बहुत बड़े स्रोत हैं, जिनसे मैं जुड़ी हुई हूं। परिवार तो है ही प्रेरणा का बहुत बड़ा तारा।

Buuks2Read : आपके जीवन में प्राप्त विशेष उपलब्धि या यादगार घटना, जिसे आप हमारे पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहते हैं?

गीता अग्रवाल : एक बार मैंने होली पर हास्य व्यंग कविता लिखी थी और वह परिवार में सबको सुनाई, मेरी छोटी बहनों ने होली पर उस कविता के हास्य को असली जामा पहना दिया और खूब हुड़दंग हुआ हंगामा हुआ। होली का मजा भी आया पर जिस पर इस्तेमाल किया वह थोड़ा नाराज हो हो गया।

Buuks2Read : हर लेखक का अपना कोई आईडियल होता है, क्या आपका भी कोई आईडियल लेखक या लेखिका हैं? और आपकी पसंदीदा किताबें जिन्हें आप हमेशा पढ़ना पसंद करते हैं?

गीता अग्रवाल : वैसे तो मैं विज्ञान की छात्रा रही, पर मुझे गोपालदास नीरज जी की कविताएं बहुत आकर्षित करती थी। इसके अलावा सुभद्रा कुमारी चौहान जी की कविताएं बहुत पसंद हैं।

Buuks2Read : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

गीता अग्रवाल : हिंदी भाषा का उत्थान जितना होना चाहिए उतना नहीं हो पा रहा है। आजकल हिंदी भाषी प्रदेशों में भी देखा गया है हिंदी पढ़ने और लिखने में छात्रों को बहुत अधिक रुचि नहीं रही है इस और ध्यान देना बहुत आवश्यक है। फिर जहां अन्य भाषाएं हैं वहां हिंदी का क्या हाल होगा। फिर भी साहित्य संस्थाएं अपने अपने तरीके से हिंदी उत्थान में सहयोग प्रदान कर रही हैं हैदराबाद, तेलंगाना में काफी प्रयास किए जा रहे हैं।

Buuks2Read : साहित्य सृजन के अलावा अन्य शौक या हॉबी, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?

गीता अग्रवाल : साहित्य सृजन के अलावा मुझे फोटोग्राफी वीडियो बनाना, मित्रों के जन्मदिन पर तरह-तरह के कोलाज बनाना बहुत अच्छा लगता है।

Buuks2Read : गीता अग्रवाल जी, क्या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?

गीता अग्रवाल : जी हां एक पुस्तक ‘इंद्रधनुष’ जो हमारे परिवार की ही पुस्तक है उसमें मैं, मेरी बहनें और पति की रचनाओं को लेकर प्रकाशित करने का विचार है, जिसका आधा लेखन हो चुका है। उसके बाद ‘चिराग जलता रहे’ मेरा दूसरा एकल काव्य संकलन होगा।

Buuks2Read : साहित्य की दुनिया में नये-नये लेखक आ रहे है, उन्हें आप क्या सलाह देगें?

गीता अग्रवाल : नए लेखकों का हार्दिक स्वागत है, समाज को सकारात्मक विचार देने का प्रयास करें, समाज को भ्रमित न करें।

Buuks2Read : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?

गीता अग्रवाल : जी हां लेखन तो अंत समय तक रहेगा।

Buuks2Read : गीता अग्रवाल जी, यह अंतिम प्रश्न है, आप अपने अज़ीज शुभचिन्तकों, पाठकों और प्रशंसकों के लिए क्या संदेश देना चाहते हैं?

गीता अग्रवाल : मेरे अजीज शुभचिंतकों, पाठकों, प्रशंसकों से यही निवेदन है कि मेरी पुस्तक पढ़कर अगर उसमें कुछ भी सुधार चाहते हैं या अन्य किसी विषय के बारे में लिखने के लिए प्रेरित करते हैं, तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा मेरा प्रयास रहेगा कि मैं उनको संतुष्ट कर सकूं। उनकी राय मुझ में नया जोश भर देगी।

आप गीता अग्रवाल जी की पुस्तक ‘दिल ने कहा’ को पूरे विश्व में कहीं से भी खरीद सकते हैं। आप देश-विदेश में अपने पसंदीदा ई-कॉमर्स स्टोर से लेखिका की पुस्तक को नीचे दिए गये लिंक से खरीद सकते हैं।

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इसके अलावा आप अपने देश की सुप्रसिद्व ई-कॉमर्स वेबसाइट पर जाकर किताब के आईएसबीएन नंबर से सर्च करके भी किताब खरीद सकते हैं। लेखिका गीता अग्रवाल जी की पुस्तक ‘दिल ने कहा’ दुनिया भर के प्रमुख ऑनलाइन और ऑफलाइन खुदरा विक्रेताओं पर उपलब्ध है।

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