साझा काव्य संग्रह ‘बाल काव्य’ की लेखिका भावना मिलन अरोड़ा जी से साक्षात्कार

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Prachi

Bhawana Milan Arora

नन्हें-मुन्नों के लिए सृजित साझा काव्य संग्रह ‘बाल काव्य’ के सभी सम्मानित लेखकों से एक एक्सक्लूसिव साक्षात्कार Buuks2Read द्वारा किया गया है। बता दें कि ‘बाल काव्य’ साझा काव्य संग्रह का संपादन खेम सिंह चौहान ‘स्वर्ण’, अर्चना पांडेय ‘अर्चि’, निकिता सेन’दीप’ और डॉ. मीना कुमारी सोलंकी ‘मीन’ जी द्वारा किया गया है। संपादकीय टीम द्वारा रचनाओं का स्तरीय चयन और संपादन कार्य बहुत ही शानदार है, जिसके लिए Buuks2Read की ओर से पुन: ढ़ेरों शुभकामनाएँ। इसी सीरीज़ में हम आपके लिए काव्य संग्रह की एक लेखिका भावना ‘मिलन’ अरोड़ा जी का साक्षात्कार आपके लिए प्रस्तुत कर रहें है।

Buuks2Read : यदि आप अपने शब्दों में हमारे और आपके सम्मानित पाठकों को अपना परिचय देंगें, तो पाठकों बहुत अच्छा लगेगा?
भावना ‘मिलन’ अरोरा : मै भावना ‘मिलन’ अरोरा, दिल्ली राज्य में पिछले 15 वर्षों से एक अध्यापिका के रूप देश की नींव सशक्तिकरण को समर्पित हूँ। बचपन से ही लेखन कार्य करती आई और विविध साहित्यिक गोष्ठियों में सम्मानित।

Buuks2Read : हाल ही में आपका साझा बाल काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ है, इसमें शामिल होने के पीछे क्या कारण रहा?
भावना ‘मिलन’ अरोरा : रोज़ बचपन के विविध रूप देखती हूँ। छात्र- छात्राओं के व्यक्तित्व में ऊर्जामयी और संघर्षमयी। बाल-काव्य में मैंने उनकी भावनाओं को पिरोया है।

Buuks2Read : साहित्यिक सेवा के लिए आपको अब तक कितने सम्मान प्राप्त हुए हैं? क्या आप उनके बारे मे कोई जानकारी देना चाहेंगे?
भावना ‘मिलन’ अरोरा : साहित्यिक गोष्ठियों में अनेकों सम्मान,सर्टीफ़िकेट, सर्वभाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली में बुंदेली भाषा की संपादिका बतौर अपनी मातृभाषा की सेवा का भाव।

Buuks2Read : आपकी पहली पुस्तक के बारे में बताएं? और कब प्रकाशित हुई थी?
भावना ‘मिलन’ अरोरा : मेरी पहली पुस्तक थी साँझा संग्रह – ‘समवेत’, जिसमें जीवन के विविध पक्ष हैं।

Buuks2Read : आप कब से लेखन कर रहें हैं और पुस्तक प्रकाशित करने का विचार कैसे बना?
भावना ‘मिलन’ अरोरा : बचपन से। पत्र- पत्रिकाओं में लिखते-लिखते जब मेरी रचनाएँ सर्वभाषा संस्था संपादकजी पढ़ीं। ब उनके प्रस्ताव स्वरूप पुस्तक लेखन का विचार बना।

Buuks2Read : पहली पुस्तक के प्रकाशन के दौरान अनुभव कैसा रहा?
भावना ‘मिलन’ अरोरा : बहुत ही यादगार और हृदय- पटल पर अमिट छबि सा। अविस्मरणीय!

Buuks2Read : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?
भावना ‘मिलन’ अरोरा : गद्य में – लघुकथा, संस्मरण और पद्य में काव्य।

Buuks2Read : आप अपनी रचनाओं के लिए कहां से प्रेरणा प्राप्त करते हैं?
भावना ‘मिलन’ अरोरा : जीवन के अनुभवों से। मित्रों वृतांत से और जैसे कि बचपन ग्रामीण परिवेश जुड़ा है तो उसकी झलक तो आती ही है।

Buuks2Read : आपके जीवन की सबसे यादगार उपलब्धि, जिसे आप हमारे और अपने पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहेंगे?
भावना ‘मिलन’ अरोरा : मेरे काव्य गीतों का स्कूलीय इंटर और राष्ट्रीय स्तर पर विद्यार्थियों के माध्यम से श्रेष्ठ स्तर प्राप्त करना और उनके चेहरे पर अपनी गुरु के लिए बिखरी श्रद्धा और स्नेह जो सर्वत्र नहीं मिलता। यही मेरी उपलब्धियाँ है।

Buuks2Read : आपका सबसे प्रिय उत्तर / लेखिका और उनकी रचनाएँ / किताब?
भावना ‘मिलन’ अरोरा : निरालाजी, मुक्तिबोध और महादेवी जी।

Buuks2Read : वर्तमान व्यवसाय और लेखन के अलावा आपके अन्य रुचियाँ क्या हैं, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?
भावना ‘मिलन’ अरोरा : खाना बनाना, डान्स और भजन लिखना, गाना।

Buuks2Read : अब तक प्रकाशकों के साथ आपका अनुभव कैसा रहा?
भावना ‘मिलन’ अरोरा : अच्छा रहा बस वर्ड्सस्मिथ पंचकुला को छोड़कर।

Buuks2Read : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?
भावना ‘मिलन’ अरोरा : सदैव सकारात्मक सोच रखें। यदि संघर्ष है, विपत्ति है तो अपना मन किसी सृजन या दूसरों की मदद में लगा लें फिर आपका मन अच्छा रहेगा। आलोचकों से स्नेह करें।

Buuks2Read : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?
भावना ‘मिलन’ अरोरा : स्त्री-विमर्श पर आधारित।

Buuks2Read : नवोदित लेखकों को क्या सलाह देना चाहेगें?
भावना ‘मिलन’ अरोरा : आलोचक यदि मिले तो रूठिए मत। वो आपको निर्मल कर जाएँगे और एक दिन आप उन्हें धन्यवाद कहेंगे।

Buuks2Read : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?
भावना ‘मिलन’ अरोरा : ताउम्र।

About the ‘Bal Kavya – Poetry Collection’

Bal Kavya Feature‘बाल कविता’ यानी बच्चों के लिए लिखी गयी कविता, जिसमें बच्चों की शिक्षा, जिज्ञासा, संस्कार एवं मनोविज्ञान को ध्यान में रखकर रचना की गई हो। वह चाहे माँ की लोरियों के रूप में हो, या पिता की नसीहतों के रूप में, या बच्चों के आपस के खेल-खेल में हो। इसमें भले ही निरर्थक शब्दों की ध्वनियाँ होती हैं, पर बड़ी आकर्षक होती हैं। ऐसी ही कविताओं को इस साझा संग्रह में शामिल किया गया है, जो नन्हें बच्चों को बहुत पसंद आयेगी।

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