‘दिव्य सफलता की कहानियाँ’ कहानी संग्रह के लेखक चतरसिंह गेहलोत जी से साक्षात्कार

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Prachi

Buuks2Read को साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय देने के लिए चतरसिंह गेहलोत जी आपका धन्यवाद करते हैं। लेखक पेशे से एक शिक्षक हैं और जिला बड़वानी, मध्य प्रदेश के निवासी हैं। चतरसिंह जी शिक्षक होने के साथ ही एक समाजसेवी भी हैं, और आपका व्यक्तित्व प्रेरक है। Buuks2Read को दिए गए साक्षात्कार में चतरसिंह जी ने अपनी साहित्यिक यात्रा के बारे में बहुत सी बातें हमें बताईं। आशा करते हैं कि पाठकों को चतरसिंह गेहलोत जी का साक्षात्कार पसंद आएगा। साक्षात्कार के कुछ प्रमुख अंश आपके लिए प्रस्तुत हैं-

Chatarsingh Gehlot Hindi Interview

Buuks2Read : चतरसिंह गेहलोत जी, नमस्कार। हम आपका शुक्रिया करना चाहते हैं क्योंकि आपने हमें साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय दिया। यदि आप अपने शब्दों में आप अपना परिचय देंगें, तो सम्मानित पाठक आपके बारे मे ज्यादा जान पायेंगे?

चतरसिंह गेहलोत : आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, मेरा नाम चतर सिंह गेहलोत है। मैं शिक्षक, कवि, लेखक और पत्रकार की भूमिका के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी सक्रिय हूं।

Buuks2Read : आपकी पहली पुस्तक पिछले दिनों ही प्रकाशित हुई है, उसके बारे में जानकारी दे, ताकि पाठक आपकी किताब के बारे में ज्यादा जान सकें?

चतरसिंह गेहलोत : जी हां बिल्कुल यह मेरी पहली पुस्तक है, लंबे समय से मेरे मन मस्तिष्क में विचार चला आ रहा था कि क्यों ना मैं दिव्यांगों के लिए भी कुछ ऐसा लिखूं जो प्रेरक हो साथ ही साथ इससे समाज भी प्रेरणा पाए। फिर मैंने तय किया कि क्यों ना ऐसे दिव्यांगों की कहानियां लिखी जाए जिन्होंने अपने संघर्ष के बल पर न केवल अपने आप को सफल बनाया बल्कि समाज को भी प्रेरणा दी है और इसका निचोड़ यह रहा “दिव्य सफलता की कहानियां” पुस्तक जो आज आपके सामने हैं।

Buuks2Read : आपकी पुस्तक ‘दिव्य सफलता की कहानियाँ’ पिछले दिनों ही प्रकाशित हुई है, उसके बारे में जानकारी दे, ताकि पाठक आपकी किताब के बारे में ज्यादा जान सकें?

चतरसिंह गेहलोत : मेरी पुस्तक “दिव्य सफलता की कहानियां” पुस्तक दिव्यांगजनों को तो प्रेरणा देती देती है, साथ ही साथ उन लोगों के लिए भी प्रेरणा स्त्रोत है जो अपने जीवन से हताश व निराश हैं और कुछ नहीं कर पाने की स्थिति में है। ऐसे में यदि कोई भी इस पुस्तक को पढ़ेगा, उसे प्रेरणा मिलेगी अपने कार्य को फिर एक नए जोश नए जुनून के साथ शुरू करने की।

Buuks2Read : चतरसिंह गेहलोत जी, पुस्तक प्रकाशित कराने का विचार कैसे बना या किसी ने प्रेरणा दी?

चतरसिंह गेहलोत : पुस्तक को प्रकाशित करने का विचार यह प्रेरणा मेरे अंतर्मन से ही उपजा है। अक्सर में मन में ऐसा सोचा करता था। क्या इंसान मरने के बाद भी कुछ ऐसा करके जा सकता है जिससे वह अमर रहे? इसी चिंतन में मुझे उत्तर दिया क्यों न मैं ऐसा लिखूं एक पुस्तक के रूप में जो मेरे बाद भी जिंदा रहे और मुझे भी जिंदा रखे, उसी का परिणाम मेरी है दिव्य सफलता की कहानियां पुस्तक है और अब यह यात्रा आगे भी जारी रहेगी।

Buuks2Read : पुस्तक के लिए रचनाओं के चयन से लेकर प्रकाशन प्रक्रिया तक के अनुभव को पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगें?

चतरसिंह गेहलोत : रचनाओं का चयन करने और सफलता की कहानियां में जो व्यक्तित्व दिए गए हैं। उन पर लिखने के लिए मुझे लंबा समय लगा है। मैंने विभिन्न स्त्रोतों की खोज की और उसके बाद जो कहानियां बन कर आई वह वास्तव में कहानियां नहीं थी प्रेरणा का एक गुलदस्ता था। इसीलिए मैंने दिव्यांग भाइयों की कहानियां होने के बाद भी इस पुस्तक का शीर्षक “दिव्य सफलता की कहानियां” दिया है ताकि हर कोई यह सोचे कि दिव्य सफलता की कहानियां क्या हो सकती है, कैसी हो सकती है? इन कहानियों को पढ़ने के लिए जिज्ञासु बन जाए।

Buuks2Read : आपकी पहली सृजित रचना कौन-सी है और साहित्य जगत में आगमन कैसे हुआ, इसके बारे में बताएं?

चतरसिंह गेहलोत : जी, आपने बहुत अच्छा प्रश्न किया है। मेरी पहली पुस्तक तो दिव्य सफलता की कहानी है ही, लेकिन इससे पूर्व मैं वर्डप्रेस ब्लॉग पर हिंदी व्याकरण और बाल कहानियां लिखा आ रहा हूं। मेरी कविताएं भी अब लगभग एक पुस्तक का रूप ले चुकी है वह भी अति शीघ्र आपके बीच आने वाली है।

Buuks2Read : अब तक के साहित्यिक सफर में ऐसी रचना कौन सी है, जिसे पाठकवर्ग, मित्रमंडली एवं पारिवारिक सदस्यों की सबसे ज्यादा प्रतिक्रिया प्राप्त हुई?

चतरसिंह गेहलोत : मेरी एक कहानी है “निशु का बस्ता”, जो रीडिंग कार्नर पर आधारित है। उस पर सर्वाधिक प्रतिक्रिया मुझे प्राप्त हुई है, साथ ही साथ जो मेरी कविताएं रहती है वह मेरे मित्रों को बहुत पसंद आती है। “निशु का बस्ता” शीर्षक को लेकर अपने बाल कहानियां पुस्तक आप सबके साथ बहुत जल्दी साझा करने वाला हूं।

Buuks2Read : चतरसिंह गेहलोत जी, किताब लिखने या साहित्य सृजन के दौरान आपके मित्र या परिवार या अन्य में सबसे ज्यादा सहयोग किससे प्राप्त होता है?

चतरसिंह गेहलोत : पुस्तक लिखने का विचार लंबे समय से चलता आ रहा था। लेकिन मुझे प्राची डिजिटल पब्लिकेशन ने जो सहयोग और मार्गदर्शन दिया, उसी का परिणाम है कि मैं आज आपके बीच आपके साथ हूं।

Buuks2Read : चतरसिंह गेहलोत जी, साहित्य जगत से अब तक आपको कितनी उपलब्धियाँ / सम्मान प्राप्त हो चुके हैं? क्या उनकी जानकारी देना चाहेंगें?

चतरसिंह गेहलोत : साहित्य जगत में यह मेरी पहली पुस्तक है। लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारी शिक्षक के रूप में हमेशा चर्चित रहा हूं। आदर्श शिक्षक सम्मान, दिव्यांग रत्न सम्मान, राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान और शिक्षा शिरोमणि सम्मान मुझे अब तक प्राप्त हुए हैं।

Buuks2Read : चतरसिंह गेहलोत जी, आप सबसे ज्यादा लेखन किस विद्या में करतें है? और क्या इस विद्या में लिखना आसान है?

चतरसिंह गेहलोत : मैं सबसे ज्यादा लेखन कविता के रूप में करता हूं क्योंकि इसमें मुझे भावनाएं व्यक्त करने में बहुत आनंद आता है और मुझे सरल भी लगता है।

Buuks2Read : चतरसिंह गेहलोत जी, आप साहित्य सृजन के लिए समय का प्रबंधन कैसे करते हैं?

चतरसिंह गेहलोत : समय का प्रबंधन तो बड़ी समस्या रहती है। लेकिन जब जब भी मुझे समय मिलता है मैं उसका पूरा-पूरा उपयोग करता हूं और मस्तिष्क में जो विचार चलते रहते हैं उनको कहानी या कविता का रुप देकर कागज पर उतार देता हूं।

Buuks2Read : चतरसिंह गेहलोत जी, आप अपनी रचनाओं के लिए प्रेरणा कहां से प्राप्त करते है?

चतरसिंह गेहलोत : मैं अपनी कहानी कविताओं के लिए प्रेरणा अपने आसपास से अपने समाज से विशेषकर उन शिक्षकों से प्राप्त करता हूं। विशेषकर मेरे शिक्षक मित्रों से जो दिन रात मेरे विषय में अपने विचार व्यक्त करते रहते हैं । जिनके कारण आज मैं एक नई मार्ग पर हूं और अच्छे मार्ग पर हूं। मैं उन सब को धन्यवाद देता हूं और आशा करता हूं, वह मुझे इसी तरह प्रेरित करते रहें।

Buuks2Read : आपके जीवन में प्राप्त विशेष उपलब्धि या यादगार घटना, जिसे आप हमारे पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहते हैं?

चतरसिंह गेहलोत : मैंने अपने जीवन में नवाचारी शिक्षक के रूप में कई उपलब्धियां प्राप्त हुई हैं और बेगुनाह बदनाम भी हुआ। लेकिन इन सब से मुझे प्रेरणा ही मिली है और आज एक अच्छे सफल शिक्षक सफल लेखक के रूप में आप सबके बीच हूं।

Buuks2Read : हर लेखक का अपना कोई आईडियल होता है, क्या आपका भी कोई आईडियल लेखक या लेखिका हैं? और आपकी पसंदीदा किताबें जिन्हें आप हमेशा पढ़ना पसंद करते हैं?

चतरसिंह गेहलोत : जी बिल्कुल आपने सही कहा, मुंशी प्रेमचंद्र की कहानियां मुझे बहुत प्रभावित करती है। सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताएं मेरे अंतर्मन को झकझोर देती है और कुछ नया अच्छा करने के लिए प्रेरित करती है। रामधारी सिंह, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद यह मेरे प्रिय लेखक हैं और इनसे में हमेशा इनको पढ़कर मार्गदर्शन ही प्राप्त करता हूं।

Buuks2Read : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

चतरसिंह गेहलोत : हिंदी साहित्य अपने उत्थान के चरम पर है। दुनिया आज हिंदी की ओर देख रहे हैं और हिंदी के चरणों में नतमस्तक है। इसमें कोई दो राय नहीं आने वाला समय हिंदी के लिए बहुत उज्जवल है।

Buuks2Read :साहित्य सृजन के अलावा अन्य शौक या हॉबी, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?

चतरसिंह गेहलोत : साहित्य के अलावा बच्चों के साथ बातें करना उन्हें प्रेरित करना दिव्यांगों के लिए कार्य करना दिव्यांगो की मदद करना मुझे बहुत अच्छा लगता है इन कामों में।

Buuks2Read : चतरसिंह गेहलोत जी, क्या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?

चतरसिंह गेहलोत : जी बिल्कुल, अच्छा प्रश्न है। मैं शिक्षक हूं और चाहता हूं कि शिक्षा के लिए भी काम करूं। कहानियों ने न केवल भारतीय साहित्य को समृद्ध किया है बल्कि संपूर्ण समाज को दशा और दिशा भी दी है। विशेषकर बाल कहानियां एक नए भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती हैं और अब मैं बाल कहानियों पर ही कार्य कर रहा हूं। अति शीघ्र मेरी बाल कहानियों पर आधारित पुस्तक भी आने वाली है।

Buuks2Read : साहित्य की दुनिया में नये-नये लेखक आ रहे है, उन्हें आप क्या सलाह देगें?

चतरसिंह गेहलोत : साहित्य तो बड़े विस्तार का क्षेत्र है और हर किसी को यहां अपने अभिव्यक्ति का अवसर मिलता है साथ ही भविष्य का निर्माण भी होता इसलिए यहां सब का स्वागत है।

Buuks2Read : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?

चतरसिंह गेहलोत : जी बिल्कुल, अब यह सफर शुरू हुआ है और ईश्वर ने चाहा तो अनवरत चलता ही रहेगा।

Buuks2Read : चतरसिंह गेहलोत जी, यह अंतिम प्रश्न है, आप अपने अज़ीज शुभचिन्तकों, पाठकों और प्रशंसकों के लिए क्या संदेश देना चाहते हैं?

चतरसिंह गेहलोत : जी बिल्कुल, यहां सबको कुछ न कुछ नया संदेश या तो लेखकों को पढ़कर मिलता है या कुछ लिखकर मिलता है। इसलिए हम सब इसका अनुसरण करें। साहित्य से ही समाज का निर्माण होता है। हम इस निर्माण के पथ पर एक साथ चले यही मेरा सुसंदेश है।

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