‘विहान के फूल’ काव्य संग्रह की लेखिका अर्चना रॉय जी से साक्षात्कार

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Buuks2Read को साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय देने के लिए अर्चना रॉय जी का धन्यवाद करते हैं। पिछले दिनों ही प्रकाशित काव्य संग्रह ‘विहान के फूल’ की लेखिका अर्चना रॉय जी ने हमारे साथ हिन्दी साहित्य के शुरूवाती सफर से लेकर पुस्तक प्रकाशन तक के अनुभव को शेयर किया। अर्चना रॉय जी के पिता डा. अरूण “सज्जन” जी स्थापित साहित्यकार एवं शिक्षाविद हैं, इसलिए यह भी कह सकते हैं कि उन्हें साहित्य सृजन की प्रेरणा विरासत में मिली है। आशा करते हैं कि पाठकों को लेखिका अर्चना रॉय जी का साक्षात्कार पसंद आएगा। साक्षात्कार के कुछ प्रमुख अंश आपके लिए प्रस्तुत हैं-

Interview with Author Archana Roy

Buuks2Read : अर्चना रॉय जी, नमस्कार। हम आपका शुक्रिया करना चाहते हैं क्योंकि आपने हमें साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय दिया। यदि आप अपने शब्दों में आप अपना परिचय देंगें, तो सम्मानित पाठक आपके बारे मे ज्यादा जान पायेंगे?

Archana Roy : मैं अर्चना रॉय, मेरा जन्म गया ज़िला अंतर्गत पूरा गांव में हुआ, शिक्षा- दीक्षा मुजफ्फरपुर शहर में हुई। पिता डा. अरूण “सज्जन” जी स्थापित साहित्यकार एवं शिक्षाविद हैं, अतः बाल्यकाल से ही साहित्यिक परिवेश में रही, मुझे पढ़ने – लिखने का शुरु से शौक रहा है। आठवीं कक्षा से ही कविताएं लिखनी शुरु कर दी थी, जो अब तक जारी है। ईश्वर की कृपा रही तो आजीवन यूहीं लेखनी जारी रहेगी।

Buuks2Read: आपकी पहली पुस्तक पिछले दिनों ही प्रकाशित हुई है, उसके बारे में जानकारी दे, ताकि पाठक आपकी किताब के बारे में ज्यादा जान सकें?

Archana Roy : जी, मेरा प्रथम काव्य – संग्रह “विहान के फूल” पिछले दिनों प्रकाशित हुई है, इस काव्य संग्रह में विविध भाव की कविताएं हैं, कुछ ग़ज़ल एवं कुछ दोहे छंद और क्षणिकाएं भी शामिल हैं। मेरा यह काव्य- संग्रह मेरे विचार से महत्वपूर्ण इसलिए है कि इसमें जितनी भी रचनाएं हैं वे प्रत्येक व्यक्ति के मन की भावनाएं हैं और सामयिक भी हैं। “विहान के फूल” काव्य – संग्रह में वो सारी बातें हैं जो आपके दिल को छू लेंगी और हर कविताओं में आप अपना ही अक्स देखेंगे।

Buuks2Read : अर्चना जी, पुस्तक प्रकाशित कराने का विचार कैसे बना या किसी ने प्रेरणा दी?

Archana Roy : पुस्तक प्रकाशित करने की तो मैं पिछले कुछ समय से सोच ही रही थी, मगर कुछ न कुछ व्यक्तिगत कारणों से इसमें विलंब हो रहा था, मगर मेरी अनुजा आभा भारती ने मुझे पुस्तक प्रकाशित करने पर काफी जोर दिया या यह कहा जाए कि प्रेरणा दी। मेरी अनुजा की वज़ह से ही इस काव्य संग्रह को प्रकाशित करने का मेरा विचार मज़बूत हुआ।

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Buuks2Read : पुस्तक के लिए रचनाओं के चयन से लेकर प्रकाशन प्रक्रिया तक के अनुभव को पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगें?

Archana Roy : रचनाओं के चयन में ज्यादा समय नहीं लगा क्योंकि मैंने कुछ समय पहले ही रचनाओं को सूचीबद्ध कर लिया था। अगर प्रकाशक की बात करें तो प्राची डिजिटल पब्लिकेशन मेरी पहली पसन्द थी क्योंकि इस प्रकाशन के अंतर्गत साझा संग्रह “किताब” में मेरी रचनाएं छप चुकी थीं और मुझे प्राची प्रकाशन का प्रकाशन – कार्य प्रत्येक स्तर पर काफी बढ़िया लगा था, इसलिए प्रकाशन के लिए पब्लिकेशन के निर्णय में भी देर नहीं लगी। प्रकाशन- प्रक्रिया में भी मुझे काफी सहयोग मिला और सोचा नहीं था इतनी जल्दी मेरा काव्य- संग्रह मेरे हाथ में होगा। प्रकाशन टीम को मैं इस हेतु धन्यवाद व्यक्त करना चाहूंगी।

Buuks2Read : आपकी पहली सृजित रचना कौन-सी है और साहित्य जगत में आगमन कैसे हुआ, इसके बारे में बताएं?

Archana Roy : शायद आप सभी को सुनकर आश्चर्य होगा कि मेरी पहली सृजित रचना का शीर्षक “मौत” था जो मैने 13 वर्ष की आयु में लिखी थी, ये कविता निराशावादी नहीं वरन सकारात्मक सोच की है क्योंकि मौत को हर कोई बुरा और नकारात्मक समझते हैं मगर मैने इसके सकारात्मक पहलू को उजागर किया है। इस कविता की कुछ पंक्तियां उद्धृत करना चाहूंगी-

जाने क्यों लोग मौत से घबराते हैं
इस यथार्थ सत्य को मानने से भी कतराते हैं…
मौत कभी धोखा नहीं देती,
ये कभी बेवफ़ा नहीं होती,
मौत अपना वादा निभाती है
ये हर किसी के जीवन में एक बार आती है…

जब मैंने अपनी ये कविता पापा को सुनाई तो उन्होंने मेरी प्रशंसा की और कहा- बेटा, सबसे पहली ही कविता मौत पर लिखा है, बढ़िया है मगर कुछ जिंदगी पर भी लिखो फिर मैने दूसरी कविता जिन्दगी पर लिखी। साहित्य जगत में आगमन की बात करूं तो यही कहूंगी कि मेरा सौभाग्य है कि मैंने अपने जीवन का प्रथम काव्य पाठ महान कवि एवं साहित्यकार आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री जी के आवास पर उनके जन्मदिन पर हर आयोजित अमृत महोत्सव पर किया था, और उनका स्नेह और आर्शीवाद भी प्राप्त किया।

Buuks2Read : अब तक के साहित्यिक सफर में ऐसी रचना कौन सी है, जिसे पाठकवर्ग, मित्रमंडली एवं पारिवारिक सदस्यों की सबसे ज्यादा प्रतिक्रिया प्राप्त हुई?

Archana Roy : वैसे तो मेरी अधिकांश रचनाएं मेरे पाठकों एवं शुभचिंतकों को पसन्द आती रही है, मगर कुछ रचनाओं को काफी सराहा गया है जिनमें “रिश्तों के समीकरण” “मौसम बदल रहा है”, “होशियारी न सीखी”, “मां तुम कैसे जान जाती हो” आदि प्रमुख हैं।

Buuks2Read : अर्चना जी, किताब लिखने या साहित्य सृजन के दौरान आपके मित्र या परिवार या अन्य में सबसे ज्यादा सहयोग किससे प्राप्त होता है?

Archana Roy : मेरे साहित्य – सृजन यात्रा में मेरे माता – पिता, मेरी छोटी बहन और सोशल मीडिया पर कुछ परम मित्र हैं, जो मेरी हौसला अफजाई करते रहते हैं।

Buuks2Read : अर्चना रॉय जी, साहित्य जगत से अब तक आपको कितनी उपलब्धियाँ / सम्मान प्राप्त हो चुके हैं? क्या उनकी जानकारी देना चाहेंगें?

Archana Roy : यूं तो मैं किसी भी पुरस्कार एवं सम्मान के लिए नहीं लिखती हूं, न ही किसी भी दौड़ में शामिल हूं। हां किसी साहित्यिक मंच को मेरी रचना अच्छी और सामयिक लगी उन्होंने मुझे सराहा और सम्मानित किया, जिनमें बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा आयोजित “शताब्दी सम्मान” सृजन आस्ट्रेलिया साहित्यिक मंच द्वारा प्रशस्ति पत्र, चिंतन साहित्यिक मंच द्वारा सम्मान, ब्रह्मसत्य पत्रिका भोपाल मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित सरस्वती पुत्र सम्मान आदि से मुझे समय – समय पर सम्मानित किया गया है।

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Buuks2Read : अर्चना जी, आप सबसे ज्यादा लेखन किस विद्या में करतें है? और क्या इस विद्या में लिखना आसान है?

Archana Roy : मेरे लेखन की विधा काव्य है। मैं कविता में ही ज्यादा सहज होती हूं वैसे कविता के अलावा हर विधा यथा आलेख, शोध, निबंध आदि में मैने रचना की है। मेरे विचार से कोई भी चीज आसान या मुश्किल नहीं होता बल्कि आपकी सहजता और रुचि किस चीज में ज्यादा होती है वो चीज़ आसान हो जाती है।

Buuks2Read : अर्चना जी, आप साहित्य सृजन के लिए समय का प्रबंधन कैसे करते हैं?

Archana Roy : जहां चाह वहां राह और वैसे भी साहित्य- सृजन मेरा प्रथम प्रेम है तो इसके लिए समय प्रबंधन करना ही करना है। मैं तो कहूंगी अन्य सभी ज़रूरी कार्य करने के बाद जब लेखन कार्य करती हूं तो उस वक्त सबसे ज्यादा सुकून और ऊर्जावान महसूस करती हूं।

Buuks2Read : अर्चना रॉय जी, आप अपनी रचनाओं के लिए प्रेरणा कहां से प्राप्त करते है?

Archana Roy : मेरी रचनाओं की प्रेरणा मेरा निजी जीवन और मेरे जीवन के आस- पास घट रही घटनाएं हैं, जो अनायास लिखने को प्रेरित करती हैं।

Buuks2Read : आपके जीवन में प्राप्त विशेष उपलब्धि या यादगार घटना, जिसे आप हमारे पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहते हैं?

Archana Roy : मेरे जीवन में यद्यपि कई ऐसी घटनाएं हैं जो यादगार हैं मगर आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री जी के समक्ष मेरा प्रथम काव्य पाठ एवं स्वागत गान मेरे लिए विशेष उपलब्धि एवं यादगार पल हैं, मैं सौभाग्यशाली हूं कि मेरी प्रथम काव्य पाठ की शुरुआत ही सरस्वती पुत्र आचार्य जी के सामने हुई, इससे बड़ी उपलब्धि क्या हो सकती है किसी रचनाकार के लिए।

Buuks2Read : हर लेखक का अपना कोई आईडियल होता है, क्या आपका भी कोई आईडियल लेखक या लेखिका हैं? और आपकी पसंदीदा किताबें जिन्हें आप हमेशा पढ़ना पसंद करते हैं?

Archana Roy : जी बिल्कुल। मुंशी प्रेमचंद जी, महादेवी वर्मा, गोपालदास नीरज जी मेरे आदर्श एवं प्रेरणाश्रोत हैं या यूं कहें कि मेरे साहित्यिक जीवन के द्रोणाचार्य हैं। महादेवी वर्मा जी की “जाग तुझे है दूर जाना” गोपालदास नीरज जी की “कुछ सपनो के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता” की पंक्तियां ऊर्जा भरती हैं।

Buuks2Read : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

Archana Roy : मेरे विचार से जब तक हम अपनी हिंदी भाषा को लेकर जागरूक और निष्ठावान नहीं बनेंगे, इज्ज़त नहीं देंगे तब तक हिंदी साहित्य अथवा भाषा का सही तौर पर उत्थान सम्भव नहीं होगा।

Buuks2Read : साहित्य सृजन के अलावा अन्य शौक या हॉबी, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?

Archana Roy : मेरे जीवन की दो मुख्य जीवन रेखा हैं लेखन और संगीत इसलिए यही दो चीज़ें मेरे खाली समय के सहचर हैं। खाली समय में लिखने के अलावा पढ़ने का भी शौक है विशेषकर प्रेमचन्द जी एवं फणीश्वरनाथ रेणु जी की कहानियां।

Buuks2Read : अर्चना रॉय जी, क्या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां। तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?

Archana Roy : मेरी अगली आनेवाली क़िताब काव्य विद्या पर ही आधारित होगी, कब आएगी ये अभी कहना जल्दीबाजी होगी।

Buuks2Read : साहित्य की दुनिया में नये-नये लेखक आ रहे है, उन्हें आप क्या सलाह देगें?

Archana Roy : नए लेखकों और साहित्यकारों को बस यही कहना चाहूंगी कि वे जो लिखें दिल से लिखें, सामयिक लिखें। किसी प्रतिस्पर्धा में नहीं बल्कि सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों पर लिखें केवल छपने और नाम के लिए नहीं वरन लोकहित और लोक समस्याओं एवं समाधानों को ध्यान में रखकर लिखें क्योंकि कलम की ताकत तलवार से भी अधिक धारदार और असरदार होती है। पाठक यदि आपके लेखन से खुद को जुड़ा महसूस करें, यही एक लेखक या साहित्यकर के लिए संतुष्टि एवं सच्ची उपलब्धि है।

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Buuks2Read : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?

Archana Roy : लेखन है तो मेरा जीवन है या यूं कह लीजिए संजीवनी बूटी है मेरे लिए लेखन। अत: लेखनी लगातार चलती रहेगी मेरी बस मां सरस्वती की कृपा बनी रहे।

Buuks2Read : अर्चना रॉय जी, यह अंतिम प्रश्न है, आप अपने अज़ीज शुभचिन्तकों, पाठकों और प्रशंसकों के लिए क्या संदेश देना चाहते हैं?

Archana Roy : मैं बस यही कहूंगी अपने पाठकों एवं शुभचिंतकों से कि अपनी प्रतिक्रिया चाहे अच्छी या बुरी देते रहें और जिस तरह अभी तक मुझे अपना स्नेह और अपनी शुभकामनाएं देते रहें हैं वही सराहना और प्रोत्साहन हमेशा आप सभी से मिलता रहे।

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